क्या ऑनलाइन कक्षाये, पारम्परिक कक्षाओं की जगह ले सकती है?

क्या ऑनलाइन कक्षाये, पारम्परिक कक्षाओं की जगह ले सकती है?

शिक्षा उद्योग में टेक्नोलॉजी के हालिया प्रवेश के साथ, विशेषज्ञों ने पारंपरिक कक्षा के तरीकों के अंत के बारे में बात करना शुरू कर दिया है।

traditional-classroomजहां एक शिक्षक पारंपरिक कक्षा में अधिकतम 40 छात्रों को पढाता था और अपने ज्ञान को साझा करने के साथ-साथ बच्चो के प्रश्नों का उत्तर देने में भी कामयाब रहा, उसके सामने ऑनलाइन कक्षाएं अलग-अलग जगह बैठे 1000 से अधिक बच्चों को एक ही वक़्त में पढ़ाने की ताकत रखती है। कहने का मतलब कोटा की कोचिंग का आनंद आप लंदन में भी ले सकते है।
पुराने ज़माने में कक्षा को एक शक्तिशाली जगह के रूप में माना जाता था, जहां नेताओं ने जन्म लिया, यह संतों द्वारा परिभाषित एक जगह थी, जो राष्ट्रों को बनाती हैं, नायक बनाती हैं और दूसरों को चेतना देती हैं, लेकिन जैसा कि हम एक योजित समाज की ओर बढ़ रहे हैं कक्षा की परिभाषा बदल कर परीक्षा में सफलता तक  सीमित होकर रह गयी है। ध्यान अब सिर्फ जल्दी सफलता के तरफ है और इस पर नहीं की ज्ञान पूरी तरह मिल रहा है की नहीं। ऑनलाइन कक्षाएं दिन भर दिन अधिक मह्त्व प्राप्त कर रही हैं।  फैकल्टी बॉक्स टीम ने कोशिश की है कि इस दौड़ में एक सन्तुलित न्याय कर सके, की कोनसा पढाई का तरीका आने वाले समय में सही साबित होगा और कैसे आप इन साधनो का सही उपयोग कर सकते है।  अपनी सफलताओ के लिए:

समय V/S गुणवत्ता

digital-classroomऑनलाइन शिक्षा टैकनोलजी की अग्रिम उपयोग के आधार पर है जो उपयोगकर्ता को अधिक सुविधा प्रदान करता है।  सामग्री की उपलब्धता बढ़ जाती है और दूर-दराज के स्थानों से भी आसानी  से पहुंचाई जा सकती है, यहां तक कि पहुंच में वृद्धि के कारण, अधिक लोग परंपरागत कक्षाओं की तुलना में उसी कक्षा में भाग ले सकते हैं, जिसका प्रति छात्र​ खर्च कम पड़ता है। जबकि  ऑनलाइन  शिक्षा,  सीखने का समय और लागत को कमकरने में मदद करती है, छात्रों को  उसी गुणवत्ता और सीखने के अनुभव देने में अभी तक सफल नहीं हो पायी है, जो  टैकनोलजी की विफलता नहीं परन्तु सभी इंद्रियों को संबोधित करने में असक्षमता का उदाहरण है, एक पारंपरिक कक्षा एक  छात्र के लगभग सभी इंद्रियों को शामिल करता है और बेहतर वातावरण देता है, जिसके कारण एक  दूसरे को आपने सामने होना है, जहा अध्यापक आपको सुन सकता है और आपको जवाब भी देसकते हो, कोईछोटा सा सवाल भी क्यों न हो वो आपके हर सवाल का जवाब भी देताहै । जब पसन्द की बात आती है तो यह छात्र​ की अपनी इच्छा की बात है की वो इन सारे कारक को कैसे तोलता है। यह दोनों के बीच एक संतुलन की तरह है और इसे छात्रों की एक व्यक्ति पर पसंद की तरह चुनना है जो उनके लिए सर्वोत्तम है।

परीक्षा में पास होना V/S ज्ञान

जब हम पढाई के लिए नियोजन करते है, सबका कोई उद्देश्य​ होता है। किसी को सिर्फ परिक्षा में पास करना होता है, पर कुछ बच्चे ज्ञान के लिए पढ़ते है, कुछ लोग जल्दी सफलता पाने के लिए सिर्फ परिक्षा के लिए पढ़ते है, पर कुछ लोग उसको समझ के पढ़ते है कि प्रश्‍न सीधे नहीं आये पर फिर भी हम उत्तर दे पाएं, उनका उद्देश्य सिर्फ पास होना नहीं बल्कि ज्ञान लेना होता है।

ऑनलाइन क्लासरूम ने खुद को अलग दिखाने और कुछ लोभित करनेवाली चीज़े लाने के लिए  ध्यान देते हुए डिज़ाइन किया है। जहां कम समय में एक दम फोकस्ड तरीको से आप जल्दी सिलेबस कवर करके एग्जाम देने लायक बनजाते है, और वही 1000-2000 बच्चो में से एक ने भी रैंक दिला दी, तो खुद को सफल घोषित कर दिया जाता है। इसीलिए जो छात्र पक्की तरीको से तैयारी करना चाहते है वो इन लुभाने वाले ऑफर्स से ख़ुद को दूर रख कर पारंपरिक कक्षा का ही भरोसा करेंगे।

मध्यम मार्ग

उपरोक्त संक्षिप्त चर्चा के बाद हम जानते हैं कि प्रत्येक का महत्व है और इसलिए यह समझना महत्वपूर्ण है कि बेहतर सफलता अनुपात के लिए दोनों संसारों के मिश्रण की आवश्यकता होगी। प्रत्येक व्यक्ति को उसको चुनना चाहिए जिनकी उन्हें ज़रूरत है और  यहां तक  कि एक पारंपरिक कक्षा शिक्षक समय और धन के रूप में इसे और अधिक किफायती बनाने के लिए कुछ ऑनलाइन कक्षा विशेषताओं को भीजोड़ सकते हैं, एक ऑनलाइन श्रेणी के प्रशिक्षक भी कुछ विचार-विमर्श सत्र या कार्यशालाओं लाकर अपनी डिलीवरी अधिक इंटरैक्टिव बना सकते हैं, इसलिए चरम सीमाओं पर बैठने से बेहतर होगा की हम एक मध्यम मार्ग की और बड़े और दोनों तरीको से फायदा उठाये ।

इस नोट केसाथ, फैकल्टीबॉक्स अपने पोर्टल पर एक नई फीचर “माई लर्निंग” शुरू  कर रहाहै, जहां लोग कक्षा में बेहतर व्याख्यान देने केलिए ज्ञान प्राप्तकर सकते हैं, बोर्ड का काम सीख सकते हैं, छात्रों के साथ कैसे बातचीत  करे और  उनके प्रदर्शन में सुधार ला सकते हैं, पूरी तरह से निःशुल्क होगा, आपको सिर्फ फैकल्टीबॉक्स के साथ रजिस्टर करना होगा।
लेख पढ़ने के लिए धन्यवाद। कृपया अपने मित्रों के साथ पसंद करें और साझा करें।

सादर
फैकल्टीबॉक्स

One thought on “क्या ऑनलाइन कक्षाये, पारम्परिक कक्षाओं की जगह ले सकती है?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *